अगर सिमरन राज की न होती तो किसकी होती ?

दूसरे सितारों की रिजेक्ट की फ़िल्मों को कर शाहरुख़ बने किंग ख़ान

 

शाहरुख़ ख़ान के किंग ख़ान बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। दरअसल शाहरुख़ दूसरे सितारों की रिजेक्ट की हुई फ़िल्में कर किंग ख़ान बने हैं। सैफ़ से लेकर ऋतिक जैसे कई सितारों ने जिन फ़िल्मों को करने से इंकार किया वो फ़िल्में – शाहरुख़ के लिए सफलता की सीढ़ी साबित हुई। टीवी सीरियल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शाहरुख़ के लिए फिल्मी सफर आसान नहीं था। आइए जानते हैं कि शाहरुख़ ने कौन कौन सी ठुकराई हुई फिल्मों में काम किया।

दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे” सैफ करने वाले थे

फिल्म के टाइटल का सुझाव अनुपम खेर की बीवी किरण खेर ने दिया था। इतना ही नहीं निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने शाहरुख़ का नाम “राज”, राज कपूर से प्रेरित हो कर रखा था

फ़िल्म “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” में चलती ट्रेन से हाथ देकर जब राज ने सिमरन को ट्रेन में अपनी ओर खींचा तो थियेटर तालियों से गूँज उठा। ये फिल्म शाहरुख़ के करियर की सबसे अहम फ़िल्म साबित हुई और इस फ़िल्म ने शाहरुख़ को रोमांस का हीरो बना दिया। शायद ही लोग ये जानते होंगे कि फ़िल्म “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” के राज के लिए , शाहरुख ख़ान नहीं, बल्कि सैफ़ अली ख़ान निर्देशक आदित्य चोपड़ा की पहली पसंद थे।

जब आमिर और सलमान ने नेगेटिव किरदार करने से इंकार किया तो शाहरुख़ नेगेटिव हो गए

फिल्म का पहले नाम किरण रखा जाने वाला था लेकिन ऋतिक रोशन के कहने पर फिल्म का नाम डर रखा गया। फिल्म में किरण के किरदार के लिए रवीना टंडन पहली पसंद थीं लेकिन ये रोल जूही चावला को मिला

जिस दौर में बड़े एक्टर नेगेटिव किरदार निभाने से कतराते थे उस दौर में शाहरुख़ उन किरदारों को करने से नही हिचकिचाएं । डर ,बाज़ीगर और अंजाम ऐसी ही कुछ फ़िल्में हैं जिनकी कल्पना बिना शाहरुख़ के नहीं की जा सकती।फ़िल्म बाज़ीगर में सलमान ख़ान नेगेटिव किरदार नहीं करना चाहते थे और उन्होंने फ़िल्म को रिजेक्ट कर दिया। शाहरुख़ ख़ान रिस्क लेने से नहीं झिझके और बाज़ीगर बन गये। हॉकी कोच के तौर पर बॉक्स ऑफ़िस को चक लेने वाले शाहरुख को ये फ़िल्म भी सलमान ख़ान के रिजेक्ट करने के बाद मिली। सिर्फ सलमान की ही नही, आमिर खान की भी कुछ फ़िल्मे हैं, जो आमिर के न कर पाने की वजह से शाहरुख़ को मिली। यश चोपड़ा की फ़िल्म डर में किरण को डराने की ज़िम्मेदारी पहले आमिर को दी गई थी लेकिन कुछ कारणों के चलते आमिर को इस फ़िल्म से निकाल दिया गया और शाहरुख़ किरण को डरा कर सुपरहिट हो गए।

स्वदेश और करण अर्जुन के लिये भी शाहरुख़ पहली पसंद नहीं थे

फिल्म स्वदेश के गीत “पल पल है भारी” को निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने गाया था। ये पहली हिन्दी फिल्म थी जिसकी शूटिंग “नासा” में की गई थी। फिल्म का नाम पहले देश रखा गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया

सलमान और शाहरुख़ की फिल्म करण अर्जुन में सलमान के साथ शाहरुख़ नहीं अजय देवगन होते अगर उन्होंने इस फ़िल्म को करने से इंकार न किया होता। निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की फ़िल्म स्वदेश का देश को प्रेम करने वाला मोहन भार्गव हर किसी को याद है।. मोहन भार्गव के लिए ऋतिक आशुतोष की पहली पसंद थे लेकिन ये फ़िल्म भी शाहरुख़ की किस्मत में थी, हांलाकि ऋतिक कई बार इस बात को कह चुके हैं कि शाहरुख़ से बेहतर उस किरदार को शायद ही कोई निभा पाता.

दूसरे सितारों की रिजेक्ट की गई ये सभी फ़िल्मे शाहरुख़ के करियर की अहम फ़िल्में साबित हुई। दूसरे सितारों ने इन फिल्मों को किसी भी कारणों से रिजेक्ट किया हो, लेकिन एक बात तो तय है कि अगर “पूरी शिद्दत से किसी चीज़ को चाहो तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने की तैयारी में लग जाती है”, शाहरुख़ के लिए ये बात सच है। सुपरस्टार बनने की चाह में मुम्बई आये शाहरुख़ अपनी चाह और किस्मत से बॉलीवुड के किंग खान बन ही गये।