आमिर ख़ान का ग्राउंड ज़ीरो पर ‘सत्यमेव जयते’

क्या पानी फ़ाउंडेशन से पानी की समस्या का हल होगी?

 
आमिर ख़ान का ग्राउंड ज़ीरो पर ‘सत्यमेव जयते’

आमिर ने सत्यमेव जयते ग्राउंड ज़ीरो पर शुरू कर दिया है। साल 2014 में सत्यमेव जयते के तीसरे सीज़न के बाद आमिर ने अपने इस अभियान को ज़मीन से जोड़ दिया है। बड़े पर्दे पर समाज से जुड़े मुद्दों को दिखाने की जगह उन्होंने पानी के मुद्दे को सुलझाने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करने का निर्णय लिया है। आमिर बताते हैं, “हमने सोचा कि सत्यमेव जयते हम टीवी पर ना करके, हमारी जो सत्यमेव जयते की टीम हैं, वह ग्राउंड पर इस विषय को लेकर काम करे। हमने पानी और महाराष्ट्र को चुना और एक साल तक हमारा रिसर्च चला। हमने सूखाग्रस्त गांवों में जाकर देखा कि जब सूखा पड़ता है तो क्या होता है। हिवारे बाज़ार और रालेगण सिद्धी ऐसे दो गांव देखे जहां सूखा तो पड़ता है, लेकिन पानी की समस्या नहीं है। हमने देखा कि उन्होंने पाणलोट का काम किया हुआ है, तो हमें भी पता चला कि हमें क्या करना है।”

साल 2014 में आमिर ख़ान ने अपने दोस्त सत्यजीत भटकल के साथ मिलकर पानी फ़ाउंडेशन की शुरुआत की और महाराष्ट्र से पानी की समस्या को दूर करने की दिशा में पहल शुरू कर दी। पिछले 3 साल में पानी फ़ाउंडेशन अपने साथ 75 तालुकाओं को जोड़ चुका है।पहले साल 116 गांव जुड़े,जिसमें से 45 गांवों में पानी की समस्या ख़त्म हो चुकी है और बाकी के गांवों मे भी यह समस्या कुछ हद तक ठीक हुई है। पिछले साल 1000 गांव जुड़े और इस साल 4000 गांव जुड़ चुके हैं। आमिर बताते हैं, “महाराष्ट्र में कुल 358 तालुका है, जिसमें से 150 सूखाग्रस्त है। हमने 3 साल में 75 तालुका को कवर किया है। खास बात यह है कि जिस गांव में हम काम कर चुके हैं वहां हमेशा के लिए पानी की समस्या का हल हो चुका है।”

किरण राव भी अपने पति का साथ देने मे पीछे नहीं रहतीं
किरण राव भी अपने पति का साथ देने मे पीछे नहीं रहतीं

पानी फाउंडेशन अपने साथ जुड़ने वाले इच्छुक गांव के पांच लोगों को साढे चार दिन की ट्रेनिंग देता है। वही पांच लोग मिलकर अपने गांव में जाकर इस अभियान का नेतृत्व करते हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का आयोजन करता है। जिसमें गांव के लोग मिलकर श्रमदान करते हैं। मानसून आने से पहले अप्रैल और मई के बीच के 6 हफ्तों के दौरान पाणलोट का काम करना होता है।सबसे बेहतर काम करने वाले तीन गांवों को ‘सत्यमेव जयते वाटर कप’ इनाम में दिया जाता है। आमिर बताते हैं, “कुछ लोग मदद करना चाहते हैं, लेकिन श्रमदान नहीं कर सकते, ऐसे लोग पैसा देकर मदद करना चाहते हैं।हम पैसा नहीं लेते, लेकिन एक संस्था है, वहां लोग पैसा दे सकते हैं।यह संस्था उस गांव में मशीन की व्यवस्था कर देती है, जो खुद पैसा खर्च नहीं कर सकते।”

1 मई को कई लोगों ने मिलकर श्रमदान किया, इस मौके पर आलिया भट्ट भी पहुंची
1 मई को कई लोगों ने मिलकर श्रमदान किया, इस मौके पर आलिया भट्ट भी पहुंची

आमिर अपने लक्ष्य की ओर धीरे धीरे ही सही, लेकिन आगे बढ़ रहे हैं। आमिर की मानें तो गांव में सबसे बड़ी समस्या जातिवाद और लोगों को एक साथ लाने की है। “पाणलोट का काम कोई दो आदमी नहीं कर सकते। सभी को एक साथ मिलकर करना है। गांव में सब को एक साथ लाना सबसे मुश्किल काम है। हम वॉटर कप में श्रमदान को सबसे ज़्यादा पॉइंट इसीलिए देते हैं क्योंकि जब पूरा गांव साथ में मिलकर श्रमदान करता है तो सारी दूरियां ख़त्म हो जाती हैं। पानी की समस्या के समाधान के दौरान न केवल पानी की समस्या दूर होती है बल्कि लोगों के मन भी बदल रहे हैं।”

आमिर के अभियान का ये तीसरा साल है और इस बार 4000 गांव इसके साथ जुड़े हैं।
आमिर के अभियान का ये तीसरा साल है और इस बार 4000 गांव इसके साथ जुड़े हैं।

महाराष्ट्र के सूखे के साथ ही जुड़ी है किसानों की आत्महत्या की समस्या। हालांकि आमिर पानी की समस्या को किसानों की आत्महत्या से जोड़कर नहीं देखते। आमिर मानते हैं, “किसानों की आत्महत्या के पीछे सिर्फ पानी की ही समस्या नहीं है, लेकिन पानी एक

महत्वपूर्ण कारण ज़रूर है। मैं मानता हूं कि पानी की समस्या दूर होने से एक पॉज़िटिव इंपैक्ट ज़रूर होगा।
आमिर अपनी फिल्मों से भी कई सामाजिक मुद्दों को उठा चुके हैं। पानी फ़ाउंडेशन के ज़रिए उनकी यह कोशिश साबित करती है कि वह वाकई समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। हालांकि असली ज़िंदगी में भी आमिर पानी के उपयोग को लेकर काफी सावधान रहते हैं। आमिर बताते हैं, “हमारे घर मे पानी को लेकर काफी सख़्ती है। हमारे छोटे बेटे आज़ाद को भी पता है कि पानी की बचत करनी है। वह ब्रश धो कर तुरंत ही पानी बंद कर देता है।”

जाहिर है कि अगर पानी की कीमत एक छोटा बच्चा जान सकता है तो आप क्यों नहीं? देश की पानी की समस्या का हल लाना केवल अकेले आमिर की ज़िम्मेदारी में शामिल नहीं। आपको, हमको और सबको मिलकर इस दिशा में काम करना होगा। शुरुआत हो चुकी है सबके जुड़ने की ज़रूरत है।