केदारनाथ है सारा की फिल्म, फिल्म शायद आपको इतना ना लुभा पाए

साल 2013 की केदारनाथ की त्रासदी के साथ प्यार की कहानी है फिल्म केदारनाथ

 
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फिल्म की कहानी

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कनिका ढ़िल्लोन ने फिल्म की कहानी लिखी हैं

केदारनाथ में साल 2013 में हुई त्रासदी पर आधारित है यह तो सबको पता है, लेकिन यह फिल्म उस त्रासदी पर खत्म होती है। फिल्म शुरु होती है एक मुसलमान जवान लड़के मंसूर(सुशांत सिंह राजपूत) से, जो हिन्दुओं के सबसे बड़े धार्मिक स्थल केदारनाथ में पिट्ठू का काम करता है। मंसूर को आखिरकार प्यार हो जाता है पंडितों की लड़की मक्कू यानि मंदाकनी से, जिसका किरदार सारा अली खान ने निभाया है। एक लव स्टोरी में जो भी एलिमेंट होने चाहिए, वो सब इस फिल्म में है। प्यार, विरोध, बगावत जैसे सभी इमोशन से भरपूर इस फिल्म में आखिर कैसे मिलन होगा इस दोनों का? मिलेंगे या बिछड़ जाएंगे, यहीं इस फिल्म की कहानी है।

 

सारा है सुशांत पर भारी

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सारा की यह डेब्यू फिल्म है

सारा ने एक अल्हड़, मुहफट लड़की का किरदार निभाया है, पंडितों की लड़की है लेकिन अपनी जाति से बाहर प्यार करने से नहीं डरती। उसके शौक भी लड़कों जैसे है। प्यार के लिए बगावत पर उतरने के लिए तैयार सारा का किरदार आपको बेहद पसंद आएगा। सारा में अापको उनकी मां अमृता सिंह की झलक कई जगह देखने को मिलेगी। खास बात है कि इस फिल्म की स्टार सारा है, कही पर भी यह एहसास नहीं होता कि यह उनकी पहली फिल्म है। एक्टिंग में जिस तरह के ठहराव की ज़रुरत है, वह सारा में है।

जहां तक सुशांत की बात है वह इस फिल्म में सारा के आगे फीके नज़र आए। हालांकि सुशांत एक बहुत ही अच्छे एक्टर है, लेकिन इस फिल्म की कहानी की मांग के अनुसार उनके पास परफॉर्म करने के लिए बहुत ही कम स्कोप था। हालांकि सुशांत के किरदार को देखकर यह बात समझ में आती है कि इस किरदार के लिए उन्होनें काफी फिजि़कल ट्रेनिंग ली होगी। केदारनाथ के पहाड़ो पर बतौर पिट्ठु चढ़ना आसान काम नहीं, लेकिन लगता है कि सुशांत की सारी एनर्जी उनकी फिजि़कल ट्रेनिंग में चली गई होगी।

इन किरदारों के अलावा नितिश भारद्वाज और पूजा गौर जैसे कलाकार भी फिल्म में है।

 

फिल्म देखे या नहीं

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फिल्म को लेकर कई विवाद ज़रुर हो रहे है, लेकिन फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं

अभिषेक कपूर बतौर निर्देशक उससे पहले रॉक ऑन और काय पो छे जैसी बेहतरीन फिल्में दे चुके है। यह फिल्म उन फिल्मों के मुकाबले फीकी दिखती है। फिल्म की सिनेमाटोग्राफी काफी बेहतरीन है। फिल्म के अंत में दिखाई गई त्रासदी के लिए इस्तेमाल किए गए वीएफएक्स भी देखने लायक है। फिल्म में अगर कुछ अच्छा नहीं तो वो है फिल्म की कहानी। आज भी साल 2013 की त्रासदी के बारे में सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन इस फिल्म में कहीं भी आपको त्रासदी हिला नहीं पाती। इतना ही नहीं फिल्म लव स्टोरी होते हुए भी आप को दोनों के प्यार में खोखलापन सा दिखता है। ना आप किरदारों के साथ खुश होते है और ना ही उनके बिछड़ जाने पर रोते है और इसके पीछे का कारण है कमज़ोर कहानी।

फिल्म में अगर कुछ देखने लायक है तो वह है सारा का अभिनय, केदारनाथ की लोकेशन। हॉट फ्राइ़डे टॉक्स इस फिल्म को ढाई स्टार देता है।