टेक्नोलॉजी और नेचर के बीच जंग की कहानी है 2.O

शानदार VFX और बेहतरीन एक्शन के लिए 2.O देखी जा सकती है

 
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सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। शंकर की इस फिल्म 2.0 का भी लोगों को बेसब्री से इंतजार था। फिल्म में रजनीकांत और अक्षय की बीच का एक्शन, बेहतरीन VFX दर्शकों के पैसे वसूल कर देता है। यह फिल्म बच्चों को बेहद पसंद आएगी। दरअसल आज के दौर में किस तरह से टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग किया जा रहा है, इस बात का संदेश भी यह फिल्म देती हैं।

फिल्म की कहानी शुरू होती है पक्षीराजन यानी अक्षय कुमार से, जो एक बूढ़े आदमी के किरदार में है और मोबाइल टावर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेते हैं। उन्होनें क्यों आत्महत्या की, इसके पीछे का क्या कारण है इस बात का कोई ज़िक्र नहीं। उनकी आत्महत्या के बाद शहर में कुछ ऐसा होता है, जिससे सभी लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं दरअसल शहर में मोबाइल इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति के हाथ का मोबाइल उड़ जाता है। ऐसी कौन सी ताकत है जिसकी वजह से सभी के मोबाइल उड़ जाते हैं और यह सभी मोबाइल आपस में जुड़कर एक खौफनाक बाज़ का रूप कैसे धारण कर लेते हैं, कैसे यह पक्षी दहशत मचाता है और कैसे डाक्टर वशीकरण (रजनीकांत) चिट्ठी और अपने नए रोबोट नीला (एमी जैक्सन) की मदद से अपने कंट्रोल में लेते हैं, यही इस फिल्म की कहानी है। दरअसल यह फिल्म नेचर और टेक्नोलॉजी के बीच के जंग की कहानी कहती है। मोबाइल रेडिएशन से पक्षियों को खतरा और कैसे मोबाइल के उपयोग से पक्षियों की संख्या कम हो रही है, जिसकी वजह से मानव जाति भी खतरे में पड़ सकती है, यही इस फिल्म का संदेश है, जिसे मनोरंजन के साथ साथ लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

कैसा है अभिनय


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यह साल 2010 में रिलीज़ हुई फिल्म रोबोट की सीक्वल है

फिल्म सुपरस्टार रजनीकांत की है और इस फिल्म में शुरू से लेकर अंत तक रजनीकांत छाए रहते हैं। जहां तक रजनीकांत के ट्रेडमार्क स्टाइल का की बात करें, तो फिल्म के आखिर में अक्षय कुमार के साथ किए गए कुछ एक्शन सीक्वेंस में उनका वह स्टाइल और स्वैग देखने को मिलता है। खास बात यह है कि थिएटर में उसी सीन पर ही तालियां पड़ती हैं, जहां रजनीकांत अपनी आंखों पर चश्मे और मुंह में पाइप के साथ स्टंट करते हुए नज़र आते हैं। इसी से ज़ाहिर हो जाता है कि उनका स्वैग लोगों को काफी पसंद आता है और वहीं उनके लिए पैसा वसूल भी है। अक्षय कुमार फिल्म के सेकंड हॉफ में ही है। इंटरवल से पहले केवल फिल्म की शुरुआत के 2 मिनट के बाद पूरे फ़र्स्ट हाफ में अक्षय का कोई रोल नहीं है। अक्षय फिल्म में ओनिर्थोलॉजिस्ट है और वो पक्षियों पर टेकनोलॉजी की वजह से हो रहे अत्याचार का बदला लेने के लिए लोगों को मारना चाहते है। बतौर विलेन उन्होंने काफी बेहतरीन काम किया है। उनके किरदार को जिस तरह पेश किया गया है, उसे देख कर एक बात तो समझ में आ जाती है कि उनके लुक पर काफी मेहनत की गई है। एमी जैकसन नीला का किरदार निभा रही है जो कि डॉ वशीकरण की बनाई गई एक मशीन यानी रोबोट है। उनका किरदार छोटा लेकिन अच्छा है।

फिल्म एक घंटा 50 मिनट की है। इंटरवल के बाद फिल्म काफी बड़ी लगती है। ऐसा लगता है कि मानो ज़बरदस्ती फिल्म को खींचा जा रहा है। लगभग 550 करोड़ फिल्म में शानदार एक्शन VFX तो ज़रूर है, फिल्म के बेस्ट सीन फिल्म का क्लाईमेक्स है। फिल्म में अगर किसी चीज़ की कमी है, तो वह है एक अच्छी कहानी। फिल्म को आसानी से थोड़ा छोटा किया जा सकता था। इस फिल्म में इमोशन की भी कमी है। हालांकि फिल्म की सिनेमाटोग्राफी (नीरव शाह) के साथ साथ रसूल पुकुट्टी का दिया साउंड इफेक्ट भी बेहतरीन है।इस बात में कोई शक नहीं कि फिल्म VFX और टेक्नोलॉजी के मामले में भारतीय सिनेमा को एक कदम आगे ले जाने का काम ज़रुर करेगी।

फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर थोड़ी और मेहनत की जाती तो फिल्म और बेहतरीन हो सकती थी। हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को 3.5 स्टार देता है।