ये विज्ञापन आपको अपनों का एहसास दिलाएंगे इस दिवाली

इस दिवाली इन विज्ञापनों को देखना ना भूले।

 
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दिवाली पर लोग खुद के लिए नए कपड़े, घर के लिए नया सामान और दूसरे के लिए कई उपहार खरीदते हैं। ऐसे में साल के इस वक्त टेलीविजन पर दिवाली को लेकर कई विज्ञापन आते रहते हैं। हालांकि ये सारे विज्ञापन सिर्फ आपकी जेब ढीली करने के मकसद से ही नहीं बनाए गए होते, इनमें से कुछ तो बेहद दिलचस्प इंसानी ज़ज़्बात समेटे होते हैं।

जानते है दिवाली के मौके पर बने कुछ दिलचस्प विज्ञापनों के बारे में , जिनमें से कुछ आपकी आंखों को कर देंगे नम, तो कुछ आपके चेहरे पर मुस्कान बिखेर सकते हैं। खास बात है कि यह सारे विज्ञापन आपको यह दिवाली महज रोशनियों, पटाखों और मिठाइयों के साथ ही नहीं, बल्कि जिंदगी का जश्न मनाने का आग्रह कर रहे हैं।

दिल्ली वाली फीलिंग वाली दिवाली

घर से दूर रहकर कोई त्योहार नहीं मनाना चाहता, लेकिन हमारा काम हमें अपने मां-बाप से थोड़ा दूर रहने पर मजबूर कर देता है। अपना घर परिवार, अपना शहर छोड़ हम काम के सिलसिले में अजनबी शहरों में अजनबी लोगों के बीच रहना पड़ता है, लेकिन अगर वो अजनबी शहर और अजनबी लोग हमारे अपने बन जाए तो दिवाली बन जाती है बेहद खास। कुछ ऐसा ही दिखाया है इस विज्ञापन में जहां एक पंजाबी लड़का अखिल अकेला रहता है और उसे इस बात का दुःख है कि इस दिवाली उसके साथ कोई नहीं है घर पर। वो दूर रहकर अपने परिवार वालों को बहुत याद करता है। उस पंजाबी लड़के की मायूसी देख लेती है उसके पड़ोस में रहने वाली एक दक्षिण भारत की रहने वाली लड़की। कैसे वो लड़की और उसका परिवार उसकी दिवाली को बना देता है कभी ना भूलने वाली दिवाली। ये विज्ञापन पड़ोसियों के प्यार को दर्शाता है और बताता है कि हमारे पडोसी भी हमारा परिवार है, जो हमारे दिल को खुशियों से रोशन कर देते हैं।

धड़कनों की आवाज़ दिल के बाहर सुनाई दे जाए ऐसी दिवाली

कहते है दिवाली अपनों के लिए जश्न मनाने का त्योहार है। कुछ ऐसा ही दिखाया गया है इस फ़ोन के विज्ञापन में, जहा एक यंग लड़की ‘ख़ुशी’( कियारा आडवाणी) को गोद लिया गया है एक अनाथ आश्रम से। ख़ुशी को बचपन से ही बड़े लाड और प्यार से पाला है उसकी मां और भाई ने। उसको कभी ऐसा एहसास होने ही नहीं दिया की उसे गोद लिया गया है। ख़ुशी अब बड़ी हो गई है इसलिए ये बात उसकी मां के रिश्तेदार कहते हैं कि तुम्हे ख़ुशी को बता देना चाहिए कि तुम उसे अनाथ आश्रम से लेकर आई हो। लेकिन उसकी मां नहीं चाहती थी कि दिवाली जैसे मौके पर वो ये बात अपनी बेटी से करे। लेकिन ये दिवाली और भी खास हो जाती है, जब ख़ुशी बताती है कि आज मैं उसी जगह गई थी, जहां आप गई थी 18 साल पहले। मां, शुक्रिया मुझे एक घर देने के लिए, एक अच्छी मां देने के लिए, मुझे एक बड़ा भाई देने के लिए। शुक्रिया मां दुनिया का सबसे अच्छा और बेहद प्यार करने वाला परिवार देने के लिए। ये विज्ञापन आपकी आंखें नम कर देगा और साथ में दिवाली के अवसर पर अपनों के होने का एहसास दिला जाएगा। इस विज्ञापन में बहुत खूबसूरत लाइन का इस्तेमाल किया है “धड़कनो को पहली बार दिल के बाहर सुना है। ”

फ़ोन से दूर अपनों के साथ जश्न मनाने वाली दिवाली

कभी दिवाली ऐसी भी हुआ करती थी जब हम मीलों चल कर जाया करते थे अपनों से मिलने उनके घर और दिवाली की बधाईयां देने। हर दिवाली परिवार वालों और दूर के रिश्तेदारों के फ़ोन के आने का इंतज़ार किया करते थे। फ़ोन पर सभी के खिलखिलाने की आवाज़ सुना करते थे। पड़ोसियों के घर जाकर उन्हें दिवाली की ढेर सारी बधाई और मिठाईयां दिया करते थे, लेकिन बदलते दौर के साथ साथ बहुत कुछ बदल गया। कुछ ऐसा ही दिखाया गया है इस विज्ञापन में। दिवाली की सफाई के दौरान एक बच्चे की दादी को उसके पापा के बचपन की डायरी मिलती है, जिसमें उन्होंने बचपन से जुड़ी दिवाली की यादों को समेटा हुआ है, लेकिन जब ये डायरी उसका 5 साल का छोटा बेटा पढ़ता है तो वो अपने पिता से कहता है ‘पापा मेरी दिवाली आपकी दिवाली से अलग क्यों? उसके पिता पूछते है बेटा मतलब क्या है तुम्हारे कहने का? तो वो बताता है आजकल कोई क्यों नहीं आता दिवाली की बधाई देने के लिए घर पर? क्यों सब मोबाइल पर व्यस्त रहते है ? क्यों सब परिवार वाले अपने फ़ोन को लेकर अपने -अपने कमरे में है? ये कैसी दिवाली है पापा। बच्चे के सवाल उसके पापा को सोचने पर मजबूर कर देते है कि हम वॉट्स अप और फेसबुक पर ही अपनों को दिवाली की शुभकामनाएं देते रहते है और मिलना तो जैसे भूल ही गए है। जिसके बाद वह सबको फ़ोन कर, घर पर बुला कर एक साथ मिलकर दिवाली का जश्न मनाते है। दिवाली की यह एड देखकर आपका भी मन करेगा कि आप दोस्तों के साथ मिल कर दीये जलाएं।

इस दिवाली कुछ अच्छा हो जाए, कुछ मीठा हो जाए।

शहरों में सब व्यस्त रहते है किसी के पास वक़्त नहीं होता अपनी और दूसरों की बात सुनने और कहने का। हर कोई अपनी दुनिया में रहता है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि लोगों को पता ही नहीं रहता उनके पड़ोसी कौन है ? कहा से हैं ? इस चॉकलेट के विज्ञापन में कुछ ऐसा ही दिखाया गया है। एक नया पड़ोसी पड़ोस में रहने आता है और वो एक छोटी सी पहल करता है दिवाली पर, अपने दूसरे पड़ोसी से जान पहचान बढ़ाने की। कैसे दिवाली के मौके पर की गई ये छोटी सी कोशिश सबको जोड़ कर रख देती है और जान पहचान बढ़ाने का पूरा मौका देती है। त्योहार की इस खूबसूरती को यह एड हमारे सामने खूबसूरती से पेश करती है।

दिवाली के दौरान आपको ऐसे और भी कई विज्ञापन देखने को मिलेंगे। खास बात है कि इन विज्ञापन का मकसद अपने प्रोडक्ट को बेचने के साथ – साथ देश को, लोगों को आपस में जोड़ना और करीब लाना भी है। आज के बदलते दौर में हमारे त्योहारों और रिश्तों में दूरी ना आ जाए इसलिए ऐसे विज्ञापनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस दिवाली इन विज्ञापनों को देखने के बाद आप भी कोशिश करें इस दिवाली अपनों के साथ जुड़ने की, उनके साथ मिल कर दिवाली का जश्न मनाने की।