परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरण देखने से पहले ये रिव्यू ज़रुर पढ़े

हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को तीन स्टार देता है, माउथ पब्लिसीटी से होगा फिल्म को फायदा

 

लगता है बॉक्स ऑफ़िस पर देश भक्ति की फिल्मों का चलन है। दो हफ्ते पहले रिलीज़ हुई फिल्म राज़ी और अब इस हफ्ते रिलीज़ हुई फिल्म परमाणु – द स्टोरी ऑफ पोखरण, ये दोनों ही फिल्में आपको भारत के अनसंग हीरोज़ की कहानियां बताता है। परमाणु द स्टोरी ऑफ पोखरण की कहानी आपको अच्छी लगेगी। इस फिल्म को देखकर आपको अपने भारतीय होने पर फिर से गर्व होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म बहुत अच्छी है और फिल्म में कोई कमियां नहीं। फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, आईये जानते हैं। शुरुआत करते हैं फिल्म की कहानी से…..

फिल्म ‘परमाणु’ अशवत राणा की कहानी है। फिल्म के पहले सीन से ही इस बात का अंदाजा आ जाता है कि उसको अपने देश से बहुत प्यार है और वह देश के लिए कुछ कर गुज़रना चाहता है। वह चाहता है कि भारत एक परमाणु शक्ति बने। उसका पहला प्रयास नाकामयाब होता है, जिसके लिए ज़िम्मेदार है ब्यूरोक्रेसी । सरकार बदलती है और उसका दूसरा प्रयास कैसे कामयाब होता है, ये इस फिल्म की कहानी है। एक साधारण आदमी की असाधारण कहानी में कैसे पांच लोग शामिल होते हैं ? कैसे अलग अलग डिपार्टमेंट के अफसरों को मिलाकर टीम बनती है और सभी अफ़सर कैसे भारतीय मिलिट्री की यूनिफॉर्म पहन एक मकसद को अंजाम देने निकल पड़ते हैं। यही इस फिल्म की कहानी है।

कई समय से फिल्म विवादों में थी, लेकिन आखिरकार फिल्म रिलीज़ हो ही गई

कलाकारों का अभिनय

सभी किरदारों का एक-एक छोटा-छोटा सा परिचय दे दिया जाता है, जो काफी है। फिल्म के सभी अफसरों ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। फिल्म पूरी की पूरी जॉन के कंधे पर है। जॉन ने अपने किरदार के साथ न्याय करने की पूरी कोशिश की है। हालांकि मद्रास कैफ़े में जॉन ने यह साबित कर दिया था कि वह किसी भी तरह के रोल को बखूबी कर सकते हैं। इस फिल्म को देखकर ऐसा लगता है कि जॉन के किरदार को और भी बेहतर रुप से लिखा जा सकता था। ऐसा लगता है मानो निर्देशक जॉन के टैलेंट का पूरा फायदा नहीं उठा पाएं क्योंकि जॉन इससे बेहतर दे सकते है, ऐसा उन्होंने कई बार साबित किया है। हालांकि जॉन को जो किरदार मिला, उसके साथ उन्होंने न्याय किया है। फिल्म में बमन ईरानी और जॉन की पत्नी का किरदार निभा रही अनुजा साठे ने भी अच्छा काम किया है।

फिल्म के प्लस और माइनस पॉइंट

फिल्म को हॉट फ्राइडे टॉक्स तीन स्टार देता है

कहते हैं महाभारत और रामायण से बहुत सी फिल्में कोई ना कोई प्रेरणा ज़रूर लेती हैं। यह फिल्म भी महाभारत के किसी एक पहलू से इंस्पायर है। हालांकि यह फिल्म देखने के बाद ही आपको पता चलेगा कि इस फिल्म में महाभारत के कौन से पहलू को लिया गया है। फिल्म की खास बात है कि फिल्म को काफी सरल रखा गया है, जिससे हर एक भारतीय अपने आप को इस फिल्म की कहानी से जोड़ सके। पोखरण में 20 साल पहले परमाणु बम टेस्ट हुए। इस टेस्ट में भारत को न्यूक्लियर पावर बना दिया, लेकिन उसके पीछे की मेहनत और तैयारियों की कहानी है ये फिल्म। कैसे अमेरिका और बाकी देशों की नज़रों से छिपाकर इस परीक्षण को किया गया? कौन-कौन शामिल था? और उस दौरान क्या क्या हुआ होगा ? कैसे भारत की बड़ी बड़ी एजेंसियां एक साथ काम कर रही थी ? इन सब बातों को निर्देशक अभिषेक शर्मा ने बहुत ही सरल तरीके से बता दिया। तरीका भी ऐसा कि देश की कोई भी कॉन्फिडेंशल डिटेल लीक भी ना हो और साथ ही दर्शकों को यह भी समझ में आ जाए कि आखिर इन परीक्षण को अंजाम कैसे दिया गया। यही इस फिल्म की खूबी भी है। फिल्म में बहुत सारी जगह रियल फुटेज का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसमें उस दौरान के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, राष्ट्रपति अब्दुल कलाम सभी का जिक्र और रियल फुटेज भी शामिल है। खास बात यह है कि जहां देशभक्ति की फिल्मों में, दूसरे देशों की निंदा करके अपने देश को बड़ा दिखाने की कोशिश की जाती है, वहीं इस फिल्म में भारत को बड़ा दिखाने के लिए दूसरे देशों की निंदा नहीं करनी पड़ी।

फिल्म के माइनस पॉइंट की बात करें तो फिल्म काफी धीमे चलती है। हालांकि फिल्म में किसी भी जगह पर आपको थ्रिल महसूस नहीं होता, इस बात की कहीं भी जिज्ञासा नहीं होती कि आगे चलकर क्या होगा (वह शायद इसलिए भी क्योंकि सभी को पता था कि इस परीक्षण का अंजाम क्या हुआ था) फिल्म के गीत सभी अच्छे है, लेकिन कुछ जगह लगता है कि अगर गीत नहीं भी होते तो भी चल जाता।

फिल्म की कहानी जितनी भी धीमे क्यों ना हो, लेकिन जब फिल्म का अंत आता है, तो हर कोई फिल्म को देखकर फिल्म की वाह-वाह करता है क्योंकि फिल्म की कहानी को इस सरल तरीके से लिखा गया है कि वह हर भारतीय के दिल को छू जाती है। फिल्म एक बार देखने लायक ज़रूर है। भारत के इतिहास से जुड़ी इस फिल्म से आपको यह तो जानकारी हो ही जाएगी कि भारत को वर्ल्ड मैप पर परमाणु शक्ति बनाने के लिए किस तरह के लोगों ने किस तरह की मेहनत की है।