बॉलीवुड के सच्चे फाइटर इरफान खान को जन्मदिन मुबारक

इरफान का पूरा काम साहबजादे इरफान अली खान है

 

साल 2018 मार्च में जब एक्टर इरफान खान को न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर नाम की बीमारी होने की ख़बरें आई, तो कई लोगों को यकीन नहीं हुआ। कुछ ही दिनों में खुद इरफान ने दिल छू लेने वाला खत अपने सोशल मीडिया पर डाला। आंखे नम कर देने वाले इस खत में जो सबसे अच्छी और खूबसूरत बात थी, वो थी ज़िंदगी को लेकर लिखी गई उम्मीद की बातें। फाइटर इरफान से यह ज़ाहिर कर दिया था कि उन्हें लड़ना है, बीमारी से लड़ना है, अपनी ज़िंदगी के लिए लड़ना है। वो लगभग एक साल से लड़ रहे हैं और लड़ कर जीत कर ही लौटेंगे।

52 साल के हो चुके इरफान खान दरअसल एक फाइटर ही है। बचपन से ही उनकी परवरिश में हर चीज़ से लड़ना और लड़ कर जीतना लिखा है। हीरो बनने के लेकर ज़िंदगी को जीतने के इस सफर में उन्होंने ना जाने कितनी ही लड़ाईयां लड़ी है। उनकी इन लड़ाइयों का जिक्र आज उनके जन्मदिन पर इसलिए भी ज़रुरी है क्योंकि उनकी यही ख़ासियत लोगों को प्रेरित कर सकती हैं। उनके जन्मदिन पर आज हम फाइटर इरफान की ही बात करेंगे।

हीरो बनने की लड़ाई

साधारण से दिखने वाले, बड़ी बड़ी नशीली आंखों वाले इरफान को देखकर शायद ही कोई इस बात का अंदाज़ा लगा सके कि यह भारतीय सिनेमा के बेहतरीन एक्टर में अपनी जगह बना लेंगे। पिता का टायर का कारोबार था, खुद क्रिकेटर बनने की चाह रखते थे, लेकिन एक दिन थियेटर करने की ठान ली। थियेटर से टीवी,टीवी से फिल्म तक के इस सफर में इरफान ने कई छोटे बड़े रोल किए। उनको पहला मौका मीरा नायर की साल 1988 में आई फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में मिला। हालांकि फिल्म में रोल तो छोटा था, लेकिन इस रोल से पहचान बड़ी मिली। हिन्दी फिल्मों में लीड रोल मिलने के लिए उन्हे अपनी लड़ाई जारी रखनी पड़ी और आखिरकार साल 2005 में उन्हे फिल्म रोग में लीड एक्टर के तौर पर कास्ट किया गया। बतौर लीड पाने का यह सफर लगभग 17 साल लंबा रहा।

हॉलीवुड में पहचान की लड़ाई

irrfan khan in life of pi
इरफान को पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है

जब हॉलीवुड में जाकर बड़े बड़े एक्टर अपना नाम कमाना चाहते थे, वो वहीं अपने टैलेंट के भरोसे इरफान खान ने वहां भी अपने अभिनय का लोहा मनवा लिया। साल 2006 में उन्होनें आसिफ़ कपाड़िया की फिल्म द वॉरियर से अपने अंतराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में बाद उन्होनें मुड़ कर नहीं देखा। द नेमसेक, ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलिनेयर, द अमेजिंग स्पाइडर मैन जैसी फिल्मों से अपनी पहचान हॉलीवुड में भी बनाई। भारतीय सिनेमा में कोई ओर कलाकार नहीं, जिसने इतनी सारी हॉलीवुड फिल्में की हो। ज़ाहिर है जिस कलाकार को अपने टैलेंट के माध्यम में बॉलीवुड में लीड रोल पाने में इतना समय लगा, उसने अपने टैलेंट के भरोसे आखिरकार दुनियाभर में पहचान बना ली।

ज़िंदगी की लड़ाई

इरफान की बीमारी की खबर सामने आते ही जहां पूरी इंडस्ट्री को एक सदमा लगा, वहीं उन खबरों के कुछ दिन बाद ही उन्होनें एक भावुक खत अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया। हालांकि खत में उन्होनें अपनी बीमारी से ज़िक्र से लेकर लंदन में इलाज, असहनीय दर्द सभी बातें अपने शुभचिंतकों के साथ शेयर की। लेकिन जिस बात में इरफान के फाइटर होने की झलक थी, उन शब्दों को इरफान ने कुछ यूं लिखा था, “आज की इस हालत में मैं केवल इतना ही चाहता हूं… मैं इस मानसिक स्थिति को हड़बड़ाहट, डर, बदहवासी की हालत में नहीं जीना चाहता। मुझे किसी भी सूरत में मेरे पैर चाहिए, जिन पर खड़ा होकर अपनी हालत को तटस्थ हो कर जी पाऊं. मैं खड़ा होना चाहता हूं।”

ज़ाहिर है कि किसी भी स्थिति में हार ना मानने वाले इरफान के इसी जज्बे ने उन्हें एक साधारण इरफान से सभी का हीरो इरफान खान बना दिया है।

इरफान आज 52 साल के हो गए है। इस मौके पर इस फाइटर इरफान के जल्द ठीक हो कर वापस आने की हर कोई दुआएं कर रहा है। कई संघर्ष के बाद हीरो बन विदेश तक में अपनी पहचान बनाने वाले इरफान की ज़िंदगी की कहानी में भले ही यह बड़ा टविस्ट आया हो, लेकिन इस मौके पर फाइटर इरफान की फिल्म डी डे का एक डायलॉग याद बिल्कुल सटीक बैठता है “ सिर्फ इंसान ही गलत नहीं होते, कभी कभी वक्त भी गलत हो सकता हैं।”

इसी वक्त को बदलकर इरफान जल्दी ठीक हो जाए, हॉट फ्राइडे टॉक्स इसी इच्छा के साथ उन्हें जन्मदिन की ढ़ेरों शुभकामनाएं देता है।