क्यों ख़ास है फिल्म ‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’?

राकेश ओमप्रकाश मेहरा की ये फिल्म इन दिनों चर्चा में है

 

राकेश ओमप्रकाश मेहरा की अगली फिल्म ‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’ एक ऐसी फिल्म है, जो देश की जड़ों से जुड़ी हुई कहानी लोगों के सामने पेश करेगी। ये फिल्म देश की उन चुनौतियों के बारे में बताएगी, जिससे आम जनता को रोज़ाना जूझना पड़ता है। लेकिन ये कहानी एक दिलचस्प और अनोखे अंदाज़ में कही जाएगी, जिससे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन होगा। इस फिल्म को बनाते हुए डायरेक्टर मेहरा ने इस बात का बखूबी ध्यान रखा है कि इसे देख कर किसी भी व्यक्ति kr भावनाएं आहत ना हों, बल्कि एक मनोरंजक अंदाज़ में वे लोगों तक सन्देश पहुंचा सकें।

क्या है फिल्म की कहानी?

इस फिल्म में मुख्य किरदार कन्नू का है, जो एक छोटा बच्चा है और घर में शौचालय ना होने के कारण अपनी मां के खुले में शौच जाने से नाराज़ है। इसी समस्या का हल ना ढूंढने के लिए वह प्रधानमंत्री को पत्र लिखता है और अपने घर में एक शौचालय बनाने की गुहार लगाता है। इस फिल्म में कन्नू की मां का किरदार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अंजली पाटील निभा रही हैं।

कैसे आया फिल्म बनाने का आइडिया?

इस फिल्म को बनाने का आइडिया मेहरा को 3 साल पहले युवा अनस्टॉपेबल नामक एनजीओ से जुड़ने के बाद मिला। इस एनजीओ से जुड़ने के बाद वे इस समस्या को नज़दीक से देख पाए। इसलिए अब मेहरा एनजीओ के साथ मिलकर समाज कार्य में जुट गए हैं। वे नगर पालिका स्कूलों में शौचालय का निर्माण भी करवा रहे हैं और उन्होंने अभी तक आठ सौ से ज़्यादा स्कूलों में शौचालयों का निर्माण कराया है।

Another film on the issue of open defecation and sanitation problems in our country
मां का किरदार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अंजली पाटील निभा रही हैं

अक्षय कुमार की ‘टॉयलेट- एक प्रेम कथा’ से अलग है ये फिल्म

कुछ लोगों का मानना है कि यह फिल्म अक्षय कुमार की ‘टॉयलेट- एक प्रेम कथा’ की तरह होगी। लेकिन राकेश ओमप्रकाश मेहरा की यह फिल्म अक्षय कुमार की फिल्म से अलग है। यह एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक मां बेटे की कहानी है, जो स्वच्छता से जुड़ी हुई समस्याओं से जूझते हैं।मेहरा की माने तो यह फिल्म झुग्गियों में बनाई गई है, जहां स्वच्छता की समस्या सबसे ज़्यादा दिखाई देती है। इसके अलावा इस फिल्म में स्वच्छता की समस्या को लेकर महिलाओं की दुर्दशा को दिखाया गया है। जैसा कि सभी जानते हैं महिला सुरक्षा देश का एक प्रमुख और चिंता का विषय है, जिससे जुड़े हुए कुछ आंकड़े परेशान कर देने वाले हैं। यूनिसेफ की माने तो महिलाओं को शौच के दौरान सुरक्षा देना काफी मुश्किल काम है। इसी दौरान उनके साथ दुष्कर्म जैसे घिनौने कर्म किए जाते हैं। शहरी इलाकों के अलावा गांव में स्वच्छता एक बड़ी समस्या है, जिस पर यह फिल्म बनाई गई है।

गांधी जी के विचारों से है प्रेरित

शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता को लेकर कई काम किए थे और अब मेहरा ने भी महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर यह फिल्म बनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा यह फिल्म लोगों के बीच आपसी संबंधों को लेकर कई खुलासे करती है। इस फिल्म में असल जिंदगी के कई पहलुओं से पर्दा उठाया जाएगा। इस फिल्म की पूरी शूटिंग मुंबई में की गई है। हाल ही में इस फिल्म की रिलीज़ डेट को लेकर खुलासा हुआ है। कहा जा रहा है कि इस फिल्म को 14 दिसंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज़ किया जाएगा। क्योंकि इस फिल्म की शूटिंग वास्तविक स्थानों पर की गई है, इसीलिए इसकी कहानी बस्तियों में रहने वाले 4 बच्चों की दोस्ती के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आएगी।