क्या आप जानते हैं: क्या है ब्राउन चॉकलेट और वाइट चॉकलेट में अंतर?

वाइट चॉकलेट को असल में चॉकलेट नहीं माना जाता

 

बच्चे हो या बड़े हर किसी को चॉकलेट खाना पसंद होता है।चॉकलेट एक ऐसी चीज़ है जिसे हम बचपन से खाते हैं और बड़े होने के बाद भी चॉकलेट के लिए हमारा प्यार कम नहीं होता। खास तौर पर डार्क चॉकलेट, जो न सिर्फ अलग-अलग डिशेस में डाली जाती है, बल्कि लोग इसे बड़े चाव से खाते भी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्राउन चॉकलेट और वाइट चॉकलेट में क्या अंतर है? नहीं न? आइये जानते हैं इसके बीच क्या फर्क है

क्या है अंतर?

आपको जानकर हैरानी होगी कि कोको बटर, शुगर, मिल्क सॉलिड से बनी वाइट चॉकलेट हकीकत में चॉकलेट नहीं होती। एक्सपर्ट की माने तो चॉकलेट वही होती है जिसमें कोको सॉलिड की खूबियां होती है। इसीलिए वाइट चॉकलेट को चॉकलेट नहीं माना जाता। यह चॉकलेट बेस के रूप में काम आती है।

Chocolate contains phenylethylamine, which triggers the release dopamine in the brain
ब्राउन चॉकलेट के दो प्रकार होते हैं, मिल्क चॉकलेट और डार्क चॉकलेट

वहीं दूसरी ओर ब्राउन कलर की चॉकलेट भी दो तरह की होती है, जिसमें कोको सॉलिड का अलग-अलग तरह से इस्तेमाल होता है। ब्राउन चॉकलेट के दो प्रकार होते हैं, मिल्क चॉकलेट और डार्क चॉकलेट। इसमें मिल्क चॉकलेट मिल्क पाउडर से बनी होती है और इसमें कोको सॉलिड 25 से 30% होता है। वहीं डार्क चॉकलेट में चीनी कम और कोको सॉलिड की मात्रा करीब 85% तक होती हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि चॉकलेट में डार्क चॉकलेट को सबसे ज्यादा हेल्दी माना जाता है। यह आपके सेहत को बेहद फायदा पहुंचाती है।

डार्क चॉकलेट के भी हैं फायदे

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में हुई शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि डार्क चॉकलेट की शुगर की मात्रा नर्वस सिस्टम के कामों पर असर डालती है, जिसे खाने से हम खुश होते हैं। लंबे समय तक किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि चॉकलेट बार के रूप में ‘कोको’ की ज्यादा मात्रा इंसान के दिलो-दिमाग पर अच्छा प्रभाव डालती हैं। कोको की ज्यादा मात्रा से याददाश्त, मनोदशा और इम्यूनिटी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि कोको में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड से शरीर की सूजन भी कम होती है और इससे इम्यूनिटी में इज़ाफा होता है।

Chocolate
कोको’ की ज्यादा मात्रा इंसान के दिलो-दिमाग पर अच्छा प्रभाव डालती हैं

डायबिटीज़ में भी है फ़ायदेमंद

डार्क चॉकलेट में मौजूद पोटेशियम और कॉपर स्ट्रोक लोगों को दिल के रोगों से बचाता हैं और इसमें पाए जाने वाले आयरन से खून की कमी पूरी होती है। चॉकलेट में पाए जाने वाले मैग्नीशियम से टाइप टू डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट प्रॉब्लम ठीक होते हैं। खासतौर पर इसका असर डायबिटीज़ पर पड़ता है। यह आपके शरीर में इंसुलिन के उपयोग को बेहतर बनाता है और इंसुलिन का प्रतिरोध भी कम करता है। डार्क चॉकलेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिसका मतलब है कि इसे खाने से खून में अचानक शक्कर की मात्रा नहीं बढ़ती।

तो अब देर किस बात की, आप भी उठाइये चॉकलेट का मज़ा।