ये है ऐसा गांव, जहां पांव रखते ही सो जाएंगे आप

यहां जाने पर लोग सालों तक सो सकते हैं!

 
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आपने दुनिया की अजीबो-गरीब और रहस्यमई जगहों के बारे में सुना होगा।कहीं लोगों पर ग्रेविटी का असर कम हो जाता है, तो कहीं बरमूडा ट्रायंगल पर जाकर प्लेन गायब हो जाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जाकर आप कुछ सालों के लिए गहरी नींद में सो सकते हैं। यह गांव कजाकिस्तान में है, जिसका नाम कलाची है।इस गांव की आबोहवा ही कुछ ऐसी है कि लोग पैर रखते हैं नींद के आगोश में समा जाते हैं। यह नींद कुछ दिनों भी हो सकती है और कुछ महीनों की भी। वहीं कुछ लोग तो सालों तक लंबी नींद के शिकार हो जाते हैं। इस गांव में पिछले कुछ सालों से ऐसी अजीबो-गरीब घटनाएं हो रही है।

कब शुरू हुआ सोने का यह सिलसिला?

इस गांव की आबादी 800 से ज़्यादा है जिसमें से 200 से ज्यादा लोग ऐसी अजीबो-गरीब नींद का शिकार हो चुके हैं
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साल 2010 में अचानक लोग गहरी नींद सोने लगे। कमाल की बात तो यह थी कि यह नींद उन्हें कभी भी और कहीं भी आ जाती थी। तब से लेकर आज तक लोगों की ऐसी रहस्यमई नींद कायम है। यह नींद कुछ दिनों तक या फिर कुछ सालों तक चलती है। यहां तक कि कजाकिस्तान की सरकार भी इस समस्या से परेशान है और लोगों से गांव छोड़ने की अपील कर चुकी है। इस गांव में लगभग 14% आबादी इस समस्या से पीड़ित है। इस गांव की आबादी 800 से ज़्यादा है जिसमें से 200 से ज्यादा लोग ऐसी अजीबो-गरीब नींद का शिकार हो चुके हैं।

सरकार पर्यटकों से अपील करती है कि वे कलाची ना जाएं
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और तो और समय बीतने के साथ-साथ यह समस्या बढ़ती जा रही है और अब इसने बच्चों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। वैसे तो इस गांव में पर्यटकों के जाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन सरकार पर्यटकों से अपील करती है कि वे कलाची ना जाएं। इसके बावजूद कुछ लोग इस गांव को देखने का मोह नहीं छोड़ पाते।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

ज्ञानिकों ने अपने शोध से यह दावा किया कि यहां कार्बन मोनोऑक्साइड बड़ी मात्रा में है और यही लोगों को लंबे समय तक सुला कर रखती है
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कुछ समय तक वैज्ञानिकों ने इस समस्या का हल निकालने की कोशिश की और गांव की संरचना और वातावरण को इसका जिम्मेदार ठहराया। वैज्ञानिकों ने ऐसा दावा किया कि गांव से निकलने वाला धुआं गांव में ही रह जाता है और यह लोगों को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन जानवरों पर ऐसी नींद का असर नहीं होता, इसीलिए इस दावे को बेबुनियाद माना गया।वहीं पिछले साल वैज्ञानिकों ने अपने शोध से यह दावा किया कि यहां कार्बन मोनोऑक्साइड बड़ी मात्रा में है और यही लोगों को लंबे समय तक सुला कर रखती है। यह गैस यूरेनियम की खदानों में पाई जाती है, जो इस गांव के काफी करीब है। लेकिन अभी भी यह दावा इस बात पर आकर ठहर गया कि इनका असर सिर्फ इंसानों पर ही क्यों हो रहा है। इस तरह वैज्ञानिकों की लाख कोशिशों के बाद भी इस समस्या का हल नहीं निकल पाया।

यही वजह है कि इस गांव ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और यह गांव इसी वजह से चर्चा में आया। यह गांव अब दुनिया की रहस्यमई जगहों में से एक माना जाता है।