मी टू के बाद प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया ने बनाये कई कड़े कानून

एक्ट्रेस से छेड़छाड़ बंद हो, इसके लिए इंडस्ट्री में बने कुछ नए नियम

 
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एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के विवाद के बाद बॉलीवुड में # मी टू ( Me too) को लेकर एक ऐसा सैलाब उठा जो अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन कोई ना कोई बड़ा नाम सामने आ रहा है। अभी तक इस विवाद में कई बड़े नाम सामने आए है। जिससे फिल्म इंडस्ट्री काफी परेशान हो गई हैं। फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के क्राइम को रोकने के लिए प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया ने कुछ नए नियम और बनाए है।

प्रोड्यूसर गिल्ड की शुरुआत 1954 में हुई थी। पहले इस गिल्ड में केवल फिल्मों के निर्माता आते थे, आज ग्लैमर इंडस्ट्री से संबंध रखने वाली हर कंपनी इसके अंडर आती हैं। फिलहाल इस गिल्ड के अध्यक्ष सिद्धार्थ रॉय कपूर है। इडस्ट्री में काम करने वाली औरतों के साथ उनके वर्कप्लेस पर हो रहे बर्ताव को देखते हुए इन नए क़ानूनों को बनाया गया है। प्रिवेन्शन ऑफ सोशल हैरेसमेंट यानी यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बनाए गए यह नियम क्या है, आइए जानते हैं।
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शिकायत दर्ज करने के लिए तीन महीने का समय

सलिएन्ट फीचर्स ऑफ दी लॉ के मुताबिक 3 महीने का समय शिकायत दर्ज कराने के लिए दिया जाएगा। आप जहां काम करती है अगर वहां आपके साथ किसी भी तरह का सेक्सुअल और मेन्टल हैरेसमेंट होता है, तो आप घटना होने के तीन महीने के भीतर इसकी शिकायत कंपनी के किसी भी बड़े अधिकारी के पास जाकर दर्ज करा सकती हैं। कई बार औरतें अपने साथ हो रही बदसलूकी के बारे में किसी को भी बताने की हिम्मत नही जुटा पाती, यहीं कारण है कि महिला को तीन महीने का वक़्त दिया गया है।

समय बंधन निवारण

किसी भी महिला के साथ हुई यौन उत्पीड़न की घटना की जांच पड़ताल जल्द से जल्द होनी चाहिए। इसके लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इन 90 दिनों में पूरी जांच पड़ताल हो जानी चाहिए। जिससे महिला को न्याय के लिए सालों साल इंतज़ार ना करना पड़े। कई बार देखा गया है कि अपने ही दफ़्तर में हुए क्राइम के लिए 5 -5 साल लड़ना पड़ा है और उसके बाद भी उन्हें कोई इंसाफ नही मिलता, लेकिन अब 90 दिनों के भीतर ही जांच रिपोर्ट पेश करनी होगी।

गोपनीयता

अब यौन उत्पीड़न की शिकायतों को काफी गोपनीय रखा जाएगा। अगर कोई महिला अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करती है, तो उसे इस बात से डरने की ज़रूरत नही रहेगी कि बाकी लोगों को इस बात का पता चला तो उसकी नौकरी जा सकती हैं। अब यह डर उन महिलाओं को नही सताएंगा क्योंकि अब ये ख़बर गुप्त रखी जाएगी।

अंतरिम राहत

अंतरिम राहत का मतलब है कि अब औरतों को बिना किसी झिझक और शर्मिंदगी से काम करने का पूरा हक़ मिलेगा। जब तक महिला के केस की पूरी तरह जांच पड़ताल नही हो जाती, तब तक उनसे कोई भी उल्टे सीधे सवाल नही पूछ सकता और ना ही उन्हें कोई ऑफ़िस से निकाल सकता है। वो पूरे सम्मान के साथ उस कंपनी में काम कर सकती है जहां उनके साथ कुछ भी ग़लत हुआ है।

प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस

प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस का मतलब है कि जब तक पूरी तरह से जांच पड़ताल नही हो जाती और कोई दोषी करार नही होता, तब तक किसी एक को भी पहले से दोषी मान कर उसके साथ दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। दोनों को अपनी बात रखने का पूरा हक़ रहेगा और फैसले से पहले दोनों को बराबर का सम्मान दिया जाएगा।
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मोनेटरी कंपनसेशन

मोनेटरी कंपनसेशन का मतलब है कि अगर किसी महिला के साथ हुई यौन उत्पीड़न की घटना सही साबित हुई, तो दूसरे पक्ष के व्यक्ति या कंपनी के मालिक को, जिसने भी ये अपराध किया है, उसे सजा मिलने के साथ -साथ नुकसान की भरपाई भी करनी होगी ।

झूठी कंप्लेंट दर्ज कराने से मिलेगी सज़ा

अगर किसी महिला ने अपने साथ काम कर रहे पुरुष पर ग़लत इल्जाम लगाए है और जांच पड़ताल के दौरान पुरुष की जगह वो महिला दोषी पाई गई तो उस महिला को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

ये कुछ नए नियम है जिन्हे मी टू के बाद बनाया गया है। आशा है कि इन नए नियम के साथ कई बदलाव बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री में आएंगे। उम्मीद है कि बिना किसी ख़ौफ़ के अब लड़कियां अपनी बात खुलकर कह सकेंगी और फिर कभी किसी का मी टू सुनने को नहीं मिलेगा।